Monday, 8 October 2018

पिता का प्यार

हमारी ज़िंदगी में ऐसे दो लोग होते हैं जो हमें निस्वार्थ प्यार करते हैं, उनके प्यार में कोई स्वार्थ नहीं होता है |बिना किसी चाह के वो हमपे अपना प्यार लुटाते हैं|
वो हैं हमारे माता पिता, माँ के प्यार को तो सब जानते हैं, सब देख पाते हैं पर पिता का कभी दिखता नहीं है |
माँ पर तो कई कवितायें लिखी गयी है पर आज मैं एक कविता उस पिता के नाम लिखती हूँ जो बिना जताए अपने बच्चों को प्यार करते हैं |

बचपन में उंगली पकड़कर चलना सिखाया
अपने बाहों के पालने में झूला झूलाया
अपने बच्चों की हर ज़िद को पूरा किया
खुद पे सारी मुसीबत लेते रहे, उफ तक ना किया
पर हमें हर मुसीबत से निकाला
बाज़ार जाके हमारे लिए कपड़े, खिलौने लिए
खुद एक कपड़े पहनते रहे
दिन - रात मेहनत करके हमारे लिए खुशियाँ खरीदा
खुद पे गम उठाते रहे,कभी अपने दर्द का एहसास नहीं होने दिया
अपने बच्चों के लिए दुनियाँ से लड़े और हमें बचाया
अगर कभी हमें डांटा भी तो खुद भी रोए
पापा आपने हमें बिना बताए खूब दुलार किया |

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